भागवत कथा को अपने जीवन में उतारना ही कथा का सच्चा प्रमाण है : प्रो. बघेल
- कथा के पंचम दिवस की कथा में भगवान के बाल लीलाओं का वर्णन
- भागवत सुनने केन्द्रीय मंत्री प्रो . एस पी सिंह बघेल

एत्मादपुर (आगरा) । छलेसर स्थित श्री कृष्ण वाटिका में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस कि कथा में भगवान के बाल लीलाओ का वर्णन करते हुए भागवताचार्य वेदप्रकाश शास्त्री जी ने कहा कि भगवान को माखन इसलिए अच्छा लगता हैं क्यूकि माखन भक्त का प्रतीक है। उन्होंने कथा में प्रवचन में समुन्द्र में कालीय नाग कि कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कालीय नाग बृज में समुन्द्र में रहता था कोई समुन्द्र में जाता तो उससे वह मार देता था।

उन्होंने गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए बताया की 7 कोस लंबे चौड़े कालिकाल के देवता गोवर्धननाथ को 7 वर्ष के कन्हैया ने अपने सबसे छोटी उगली में 7 दिनरात अपनी अंगुली पर रखा। भगवान धारण किए रहे इंद्र देव का अभिमान तोड़ा। इस लिए जीव को कभी अभिमान नहीं करना चाहिए और कर्म करना चाहिए फल की इच्छा नहीं रखनी चाहिए,जिससे कर्म करोगे तो फल मिलेगा इसलिए भगवान ने भी कर्म को प्रधान बताते हुए कहा कर्म करना जीव का धर्म है फल देना मेरा काम है।

केंद्रीय मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि भागवत कथा को अपने जीवन में उतारना ही कथा का सच्चा प्रमाण है। कलयुग में धरा पर पाप और अत्याचार बढ़ गया है। कथा के मात्र श्रवण से मनुष्य के सारे दुःख और दर्द दूर हो जाते हैं। मनोयोग से कथा में बैठना लक्ष की प्राप्ति तक पंहुचाता है ।
रिपोर्ट ——- राम किशोर बघेल, एत्मादपुर
