ये तालाब नहीं, ‘नगरपालिका’ के प्रमुख ‘मौहल्ले’ का मार्ग है…
- नगरपालिका की लापरवाही से नरक बना मौहल्ला सत्ता
- सालों पुरानी समस्या जस की तस
एत्मादपुर (आगरा)। यह तालाब नहीं, न ही किसी नदी किनारे का रास्ता। यह मौहल्ला सत्ता का वह मुख्य मार्ग है, यहां सैकडों की संख्या में स्कूली बच्चे व स्थानीय मौहल्ले के साथ अन्य मौहल्ले के राहगीर भी सुगम रास्ते को देखकर गुजरते करते हैं। इस समय मौहल्ला सत्ता नगर पालिका की लापरवाही से नरक बना हुआ है।
एत्मादपुर नई पानी की टंकी स्थित मौहल्ला सत्ता बघेलान नगर पालिका के चार बड़े वार्ड 22, 12, 13 और 04 से संयुक्त रूप से जुड़ा हुआ है। जिनकी आबादी प्रत्येक वार्ड से एक हजार की संख्या जोड़ी जाए तो लगभग चार हजार के करीब है। जल जल भराव यहां कोई नई समस्या नहीं है। यह अदम्य दुशवारियां सालों स्वचलित हैं। इस जल भराव से स्कूली बच्चों का गुजरना तो लाजमी है ही। नाले नालियों का एकत्रित गंदा पानी घरों की देहरी को पार कर गृहस्थी के जीवन में चूल-चौका तक पहुंच चुका है। नगर पालिका की इस अंनूठी परंपरा (लापरवाही) से लोगों की खुशहाल गृहस्थी को संकट में डाल दिया है।
यक़ीनन, नगर पालिका के अध्यक्ष व प्रशासनिक अधिकारी तथा सभासद इस परंपरागत समस्या से अछूते नहीं है। सभी को अपनी कारगुजारी और हित में समाहित हैं।
यह रहे वर्तमान व पूर्व सभासद
एत्मादपुर। वार्ड नंबर 12 से तीन बार हैट्रिक लगाने वाली सभासद शारदा देवी बघेल, 22 से ज्ञान देवी, पूर्व सभासद स्वदेश बघेल, 13 से दो बार की नीतू बघेल, 4 से मिथलेश देवी, पूर्व अनीता देवी सभासद रहीं हैं। अब तक इन्होंने भी जल भराव की समस्याओं को सुचारू रखने का कार्य किया है।
10 साल का चेयरमेन कार्यकाल
एत्मादपुर। सन 2012 में अनुसूचित सीट पर दूसरी बार पालिकाध्यक्ष रहे स्वर्गीय सतीश चंद्र बाल्मीकि साढ़े सात बर्ष का कार्यकाल में उनका निधन हो गया। खाली सीट पर उपचुनाव में ढाई बर्ष वीना धनगर चेयरमेन रहीं। 2017 कि निकाय चुनाव में परिसीमन होने पर यह सीट पिछड़ा वर्ग के लिए रही। जिस पर राकेश बघेल अध्यक्ष चुने गए। इन्होंने भी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। 2023 में इसी सीट पर वर्तमान अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुशवाहा हैं। इनसे भी जनता उम्मीद की आस लगाए बैठी है।
